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पश्चिम बंगाल में पार्टी द्वारा दिए गए कार्यों के निर्वहन के चलते कुछ समय से आपके बीच अलवर नहीं आ पाया हूँ। मगर मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि मैं पश्चिम बंगाल से भी यह सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत हूँ कि अलवर में विकास कार्य लगातार चलते रहें।
बीता सप्ताह नवरात्र का पुण्य समय रहा। विकास को गति देने के लिए इससे शुभ समय क्या ही हो सकता था। इसलिए, हमने इस पावन समय पर अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए जो अलवर में विकास को आगे बढ़ा सकें।
अलवर की महिलाओं का सशक्तिकरण और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करना मेरा सदैव संकल्प रहा है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए हमने अलवर में ‘मायरा योजना’ को प्रारंभ किया है।
राजस्थान सरकार की सरस मायरा योजना दुग्ध उत्पादक किसानों एवं पशुपालक परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग देने वाली एक अत्यंत संवेदनशील और जनकल्याणकारी पहल है। इस योजना के अंतर्गत डेयरी से जुड़े पंजीकृत किसानों को उनकी बेटी के विवाह के अवसर पर ₹21,000 की आर्थिक सहायता ‘मायरा’ स्वरूप प्रदान की जाती है। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि समाज और डेयरी परिवार की ओर से आत्मीय सहभागिता का प्रतीक है।
पिछले सप्ताह बडला महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति तथा चुंदाला महिला दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति (राजगढ़) में इस योजना के अंतर्गत मायरा भरा गया। योजना की सबसे विशेष बात यह है कि डेयरी परिवार समिति सदस्यों की बेटियों के विवाह में भाई बनकर अपना दायित्व निभाता है, जिससे ग्रामीण परिवारों को भावनात्मक और आर्थिक दोनों प्रकार का संबल मिलता है।
प्रत्येक मायरे में ₹21,000 की सहायता राशि प्रदान की जाती है, जिससे बेटियों के विवाह के समय परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम होता है। योजना के प्रावधानों के अनुसार किसी भी समिति सदस्य को अधिकतम दो बेटियों के विवाह तक इसका लाभ मिलेगा। यदि दोनों बेटियों के विवाह अलग-अलग समय पर होते हैं, तो ₹21,000-₹21,000 की राशि अलग-अलग प्रदान की जाएगी। वहीं, यदि दोनों का विवाह एक साथ संपन्न होता है, तो कुल ₹21,000 की एकमुश्त सहायता दी जाएगी।
इसके साथ ही, वे सभी महिलाएं एवं परिवार, जो पिछले तीन वर्षों से डेयरी से निरंतर जुड़े हुए हैं, इस योजना के लाभ के पात्र होंगे।
यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मेरा विश्वास है कि इससे अलवर की माताओं-बहनों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और हमारी बेटियां नए सपनों के साथ अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकेंगी।
इसी विकास क्रम में हमने अटल प्रगति पथ योजना के अंतर्गत ₹22 करोड़ की लागत से 11 गांवों में सड़क निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की है।
इस महत्वपूर्ण निर्णय से मुण्डावर के पेहल, मातौर, किशनगढ़बास के घासोली, तिजारा के जैरोली, झिवाणा, बहरोड़ के गिगलाना, बानसूर के कराना, हरसौरा, कोटपूतली के दांतिल, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ के रैणी, मौजपुर, हरसाना तथा अलवर ग्रामीण के बीजवाड़ा, बरखेड़ा गांव लाभान्वित होंगे।
इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम, सुरक्षित और तेज़ होगा, जिससे किसानों, विद्यार्थियों, महिलाओं और व्यापारियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क से गांवों की पहुंच शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार जैसी मूलभूत सुविधाओं तक और अधिक मजबूत होगी। यह कार्य क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बीते सप्ताह, डीएमएफटी योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में आपके सांसद के नाते मेरे द्वारा प्रस्तावित ₹4.81 करोड़ के विकास कार्यों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इस आवंटन से रामगढ़, गोविंदगढ़, मालाखेड़ा, उमरैण, थानागाजी, कठूमर, राजगढ़ और रैणी क्षेत्र प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे।
इस राशि से क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, आधारभूत ढांचे के विकास तथा जनोपयोगी कार्यों को गति मिलेगी। विशेष रूप से सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामुदायिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में सुधार होगा, जिससे आमजन के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
यह स्वीकृति इन क्षेत्रों के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
इन विकास योजनाओं की जानकारी के साथ आज इस पाती को यहीं समाप्त कर रहा हूँ। अगले सप्ताह नए विकास कार्यों की सूचनाओं के साथ दोबारा इस पाती के माध्यम से आपसे जुड़ूँगा।
आपका अपना
भूपेंद्र यादव