‘एक पाती अलवर के नाम’ | 27.07.2026

27/07/2026

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जैसा कि आप सभी जानते हैं कल, 26 जुलाई को मुझे आपके साथ जगन्नाथ मेले के अवसर पर अलवर के कटीघाटी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्री जगन्नाथ जी एवं माता जानकी जी के दिव्य विवाह महोत्सव में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की जीवंतता का सुंदर परिचय दिया।

हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण तथा उनसे जुड़े श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना भी हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी दिशा में आपको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि करणी माता मंदिर और बाला किला जाने वाले क्षतिग्रस्त पहाड़ी मार्ग की मरम्मत के लिए ₹4.80 करोड़ की स्वीकृति दे दी गयी है।

जून 2025 में भारी वर्षा के दौरान यह मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद जुलाई 2025 में लोक निर्माण विभाग द्वारा इसकी मरम्मत कराई गई, लेकिन बाद में सड़क पुनः टूट गई, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई थी और श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। अब इस स्वीकृति के बाद मार्ग का स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण सुधार किया जाएगा, जिससे करणी माता मंदिर और बाला किला आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की आवाजाही अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकेगी।

बहरोड़ क्षेत्र के खिलाड़ियों और मेरे युवा साथियों के लिए बीता सप्ताह विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। बहरोड़ में ₹3.64 करोड़ की लागत से आधुनिक मिनी इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दे दी गयी है। लंबे समय से जर्जर पड़े पुराने छात्रावास की जगह अब एक आधुनिक खेल परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अभ्यास की सुविधाएँ मिल सकेंगी। मेरा विश्वास है कि यह परिसर क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को निखरने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। खेल अवसंरचना का विकास युवाओं के उज्ज्वल भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। मेरा विश्वास है कि अलवर लोकसभा क्षेत्र के युवाओं में मैंने अद्भुत खेल प्रतिभाएं देखी हैं। आपके सांसद के नाते मेरा यह लगातार प्रयास रहा है कि इन प्रतिभाओं को निखरने के लिए संसाधन और प्रदर्शन के लिए मंच की कमी न पड़े। बहरोड़ का मिनी इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स इसी दिशा में मेरा एक प्रयास है।

कोई भी समाज प्रगति के सही मानकों को तब तक नहीं प्राप्त कर सकता जब तक वो समाज महिलाओं के प्रति संवेदनशील ना हो।

बीते सप्ताह हमने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। 'प्रसव सखी' योजना के अंतर्गत अलवर के जनाना अस्पताल में समर्पित हेल्प डेस्क स्थापित करने का फैसला लिया गया है जहाँ 24 घंटे 'प्रसव सखियों' की तैनाती रहेगी। यह व्यवस्था गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में पंजीकरण से लेकर उपचार तक हर चरण में सहयोग प्रदान करेगी, जिससे उन्हें और उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि गर्भवती महिलायें अपने और अपने शिशु के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें। जल्द ही यह सुविधा रामगढ़ उप जिला अस्पताल में भी शुरू की जाएगी, जिससे अधिक से अधिक माताओं को सहज और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

गोविंदगढ़ क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल के रूप में अब यहाँ सहायक अभियंता कार्यालय की शुरुआत की जा रही है। इससे पेयजल संबंधी समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की निगरानी से जलापूर्ति व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी। पहले गोविंदगढ़ का कार्य लक्ष्मणगढ़ से संचालित होता था, जिससे समस्याओं के समाधान में समय लगता था। अब गोविंदगढ़ और बड़ौदामेव के लिए अलग-अलग कनिष्ठ अभियंताओं की व्यवस्था तथा गोविंदगढ़ में सहायक अभियंता की नियुक्ति से क्षेत्रवासियों को अधिक त्वरित और बेहतर सेवाएँ मिल सकेंगी।

हम पर्यावरण के क्षेत्र में भी पूरी निष्ठा के साथ कार्यरत हैं।

इस मानसून सीजन में लक्ष्मणगढ़ वन विभाग की नर्सरी में 1 लाख पौधे तैयार किए गए हैं, जिनका इस माह में आमजन, शिक्षण संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और सरकारी-गैर सरकारी संस्थाओं को न्यूनतम दरों पर वितरण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पौधरोपण को प्रोत्साहित करना और पर्यावरण संरक्षण में जन भागीदारी बढ़ाना है। नर्सरी में 30-35 से अधिक किस्मों के पौधे उपलब्ध हैं, जिनमें छायादार, फलदार और फूलदार पौधे शामिल हैं। इनमें नीम, पीपल, अशोक, करंज, आंवला, बांस, इमली, अमरूद, अनार, जामुन, आम, पपीता, गुलाब, मोगरा, गुलमोहर, रातरानी और चंपा जैसे पौधे हैं। इनमें से लगभग 74 हजार पौधे न्यूनतम दरों पर आमजन को उपलब्ध होंगे। चिमरावली व बंधबास स्थित नर्सरी में दो फीट से लेकर पांच फीट तक के पौधे उपलब्ध हैं। यह अभियान न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखेगा, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए हरा-भरा भारत भी सुनिश्चित करेगा।

विकास तभी सार्थक होता है जब वह समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचे और जीवन को सरल, सुरक्षित तथा बेहतर बनाए। विगत सप्ताह की ये सभी पहल धार्मिक स्थलों तक बेहतर पहुँच, युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार, मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील बनाना, पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करना और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना इसी सोच का प्रतिबिंब हैं।

 

आपका अपना

भूपेंद्र यादव