‘एक पाती अलवर के नाम’ | 05.10.2026

05/10/2026

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सभी को राम-राम। आज की एक पाती अलवर के नाम। मैं आपसे सुदूर फिजी से लिख रहा हूँ। लगभग 300 द्वीपों से मिलकर बना फिजी प्रशांत महासागर में बसा एक सुंदर द्वीप समूह है। मैं यहाँ भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए प्री-COP वार्ताओं में भाग लेने आया हूँ।

हर सोमवार की तरह आज भी मन अलवर की ओर है। यह पाती भी विकास कार्यों और अलवर की प्रगति से जुड़ी जानकारी आप तक पहुँचाने के लिए ही लिखी जा रही है। लेकिन इस समय पंचायत चुनाव 2026 के कारण लागू आदर्श आचार संहिता के चलते नए विकास कार्यों और परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करना संभव नहीं है।

फिर भी, नगर निकाय चुनाव और पंचायत चुनावों के बीच मिले इस छोटे से अवसर में हमने अलवर लोकसभा क्षेत्र के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये के विकास कार्यों को आगे बढ़ाया। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े अनेक कार्यों को स्वीकृति मिली, उनका लोकार्पण हुआ और कई परियोजनाओं की शुरुआत हुई।

आज मैं आपको प्रकृति के विकास और विस्तार के लिए की गयी एक बड़ी पहल के बारे में बताना चाहता हूँ।

कल ही राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क के सम क्षेत्र में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के पुनर्वास (रीवाइल्डिंग) की ऐतिहासिक शुरुआत करने का सौभाग्य मिला। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को राजस्थान में हम गोडावण कहते हैं। जैसा कि आप जानते हैं गोडावण राजस्थान का आधिकारिक राज्य पक्षी है और इसका राज्य की जैव विविधता, पर्यावरण, संस्कृति और पहचान में एक महत्वपूर्ण स्थान है। गोडावण थार के रेगिस्तान की शुष्क घासभूमियों का एक प्रमुख पक्षी है। यह उस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वस्थ होने का सूचक माना जाता है। मतलब इस पक्षी का विलुप्त हो जाना मरुस्थल की घासभूमियों के लिए खतरे का संकेत है, जिससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।

गोडावण फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों, टिड्डियों, चूहों और सांपों को खाता है। मानसून के दौरान आने वाले टिड्डी दलों को खाकर यह फसलों की प्राकृतिक रूप से रक्षा करता है। आपको यह जानकर खुशी होगी कि कई वैज्ञानिकों ने कल हुए गोडावण पुनर्वास कार्यक्रम के लिए एक दशक तक लगातार मेहनत की है। अपना घर, परिवार छोड़कर इन लोगों ने गोडावण संरक्षण को अपना जीवन दिया है।

यह केवल वन्यजीव संरक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के संकल्प का प्रतीक है।

आज मैं आपको यह भी बताना चाहता हूँ कि सरस डेयरी के माध्यम से अलवर के किसानों को किया जा रहा सालाना भुगतान लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 में किसानों को ₹292 करोड़ का भुगतान किया गया था, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹350 करोड़ हो गया है।

यह बढ़ोतरी अलवर के दुग्ध उत्पादक किसानों की मेहनत, पशुपालन क्षेत्र की मजबूती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बढ़ते अवसरों का प्रमाण है।

हमारा प्रयास है कि किसानों को उनकी उपज का समय पर और बेहतर मूल्य मिले, डेयरी क्षेत्र से जुड़े परिवारों की आय बढ़े और सरस के माध्यम से अलवर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिले ।

इसी दिशा में आने वाले समय में दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाओं को और मजबूत करने पर भी निरंतर काम किया जाएगा।

फिजी से लिखी जा रही आज की यह पाती भले ही अलवर से हजारों किलोमीटर दूर है, लेकिन मन और विचार सदैव अलवर की उन्नति के साथ हैं। आचार संहिता समाप्त होते ही विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी फिर आपसे साझा करूंगा।

अलवर का अनवरत विकास मेरा उद्देश्य है और इसके लिए प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।

आपका अपना


भूपेंद्र यादव